पच्चीस लाख जंतर मंतर!

पच्चीस लाख जंतर मंतर

1.

आया हुआ हर एक व्यक्ती अकेला था
पर अकेले होना आपत्ति नहीं थी

पहचाने पुछी गई
कौन जात
कौनसा वर्ण कौनसा धर्म
इस के अलावा पूछा भी क्या जा सकता है
इस प्रदेश में

इस विशाल प्रदेश में
न्याय नहीं मिलता कही अयोध्या में
और मुक्ती नहीं मिलती काशी में

पुराण मे पुरातत्व में भले
कितने ही महान हो काशी-मथुरा
वहा न तो मुक्ती मिलती है
न आजादी

आजाद होने के लिये आत्यंतिक अकेला होना पडता है
और रचना पडता है नया नगर
जैसे पच्चीस लाख अकेले मिलकर
बनाते है जंतर मंतर.

2.

ये जंतर मंतर के लिये कौन सी गाडी जाती है भाई –

कोई गाडी आपको
जंतर मंतर लेके नहीं जा सकती
इसिलिये नहीं की टिकट नहीं
या ट्रॅफिक है या बॅरिकेड्स है

बल्की इसिलिये की गाडी से
जंतर मंतर नहीं पहुंचा जा सकता

जंतर मंतर पहले ही पहुंचना पडता है
गाडी बाद में मिलती है
ज्यो की जंतर मंतर व्यापार नगरी नहीं

लोग इसको हातो से रोज बनाते है
कभी दिल्ली मे कभी पटना मे
कभी दादर कभी नागपूर मे
कभी केन-बेटवा में.

सागर कांबळे हे डॉक्टरल फेलो संशोधक, लेखक आहेत.

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